चालाक गधा

चंदन जंगल में एक शेर रहता था। वह रोज किसी न किसी जानवर को मारकर खा जाता था। सभी जानवर उससे डरते थे। 
एक बार जंगल के सभी जानवरों ने सभा की और यह तय किया कि एक जानवर रोज खुद ही शेर के पास चला जाए, ताकि शेर उसे खाकर अपना पेट भर सके और फिर अन्य जानवर बिना डरे जंगल में घूम-फिर सकें। 
जंगल के जानवरों ने जब अपनी यह योजना शेर को बताई, तो शेर ने सोचा कि जब एक जानवर खुद ही रोज उसके पास आ जाएगा, तो बड़े आराम से उसका पेट भरता रहेगा। वह चैन की नींद सोया करेगा। 

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 जंगल में ईमानदारी से एक जानवर अपनी बारी के अनुसार शेर के पास जाता रहा और शेर उसे खाकर अपना पेट भरता रहा। 
एक बार शेर के पास जाने की बारी एक गधे की आई। वह उसे खाने ही वाला था कि गधे ने कहा, ” महाराज, अगर आप मुझे नहीं मारेंगे, तो मैं आपके बहुत काम आऊंगा।” 
 शेर बहुत जोर से हंसा और बोला, “हा-हा! एक मूर्ख गधा भला मेरे क्या काम आएगा?”
गधे ने कहा, “महाराज, आप जंगल के राजा हैं,  दूर दूर के जंगलों में भी आपकी इतनी प्रतिष्ठा है। फिर भी आप पैदल चलते हैं, यह अच्छा नहीं लगता है। आपकी अपनी सवारी होनी चाहिए। आप ऐसा करें कि एक मुकुट पहन लें और मेरी पीठ पर बैठ जाएं। आपको जहां जाना होगा, मैं आपको लेकर चलूंगा। इससे आपकी प्रतिष्ठा बहुत बढ़ जाएगी और आसपास के जंगलों के जानवर भी आपकी इज्जत करने लगेंगे।” 
शेर ने सोचा, ‘गधा बात तो सही कह रहा है। मैं इतना बड़ा राजा हूं और पैदल चलता हूं , क्यों न गधे की बात मान लूं।”

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अब गधा उसके लिए लताओं और पत्तों से एक मुकुट बना लाया और वह शेर को पहना दिया। अब शेर को जहां भी जाना होता, तो वह मुकुट पहनकर गधे की पीठ पर अकड़कर बैठ जाता। शेर को खाने की कोई चिंता तो थी नहीं, रोज एक जानवर खुद ही उसका भोजन बनने के लिए चला आता था।
कई महीने ऐसे ही गुजर गए। एक दिन जंगल के बीचोबीच जहां अनेक जानवर इकट्ठे थे, गधे ने शेर को अपनी पीठ से गिरा दिया। शेर को बहुत गुस्सा आया। 
 शेर ने क्रोध में भरकर पूछा, “अरे गधे! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई कि तुमने मुझे गिरा दिया, मैं तुम्हें मारकर खा जाऊंगा।”

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इस पर गधे ने शेर को एक दुलत्ती मारी और कहा, “मुझे मारकर तो तब खाओगे मूर्ख शेर, जब तुम मुझे पकड़ पाओगे, मुझे पकड़कर तो दिखाओ।” यह कहकर गधा वहां से भाग खड़ा हुआ।
 और यह क्या, शेर गधे के पीछे भाग ही नहीं पाया। उसे अपने पैरों में शक्ति ही महसूस नहीं हो रही थी। उसके पैर अत्यंत कमजोर हो चुके थे।  गधा उससे कुछ दूर खड़ा मुसकरा रहा था। अन्य जानवर शेर की हालत देखकर हंस रहे थे। धीरे-धीरे जंगल के सभी जानवरों को यह खबर हो गई कि शेर के पैर कमजोर हो चुके हैं। अब वह किसी भी जानवर का शिकार नहीं कर सकता है। 
अब जंगल के जानवरों ने शेर के पास जाना भी छोड़ दिया। इस तरह शेर भूख से तड़पकर मर गया। 
जंगल में हर तरफ हंसी-खुशी का वातावरण हो गया।  

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